
एक समय था, घर में रिश्तों का इन्द्रधनुष हुआ करता था… आज परिवार सिमटकर कुछ चेहरों तक रह गया
परदादा-परदादी से लेकर चाचा-चाची, मामा-मामी और भाई-बहनों तक रिश्तों से भरे घर आज छोटे परिवारों में सिमटते जा रहे हैं। आखिर रिश्तों की मिठास क्यों खो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?



